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मध्य प्रदेश

भोपाल में फर्जी दस्तावेजों से वाहन ट्रांसफर, आरटीओ की भूमिका सवालों घेरे में !

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22 Oct 2026, 01:34 PM IST0 reads
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भोपाल में फर्जी दस्तावेजों से वाहन ट्रांसफर, आरटीओ की भूमिका सवालों घेरे में !

भोपाल 23 जनवरी :  भोपाल का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। आरोप है कि दलालों के जरिए बिना वाहन मालिक की जानकारी और उपस्थिति के 13 लाख कीमत की टाटा 407 को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद आरटीओ ने कागजों में तो वाहन को असली मालिक के नाम वापस कर दिया, लेकिन न तो आरोपी पर कार्रवाई हुई और न ही वाहन अब तक मालिक को वापस मिल सका। आरटीओ जितेंद्र शर्मा का कहना है कि वाहन स्वामी की ओर से ऑनलाइन आवेदन किया गया था। उसी आवेदन के आधार पर उस समय पदस्थ आरटीओ द्वारा वाहन के ऑनलाइन ट्रांसफर की सूचना दर्ज की गई थी।

2016 में खरीदी थी टाटा 407

सिद्धार्थ लेक सिटी निवासी धीरेन्द्र सिंह चौहान ने वर्ष 2016 में टाटा 407 खरीदी थी। उस समय वाहन की कीमत करीब 8.50 लाख रुपए थी। वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर MP04 GB 0670 है। धीरेन्द्र ने यह वाहन दानिश नगर स्थित केरी सॉफ्ट लिमिटेड में किराए पर लगाया था।

किराया विवाद के बाद खुला फर्जीवाड़ा

धीरेन्द्र के अनुसार, शुरुआत में किराया समय पर मिलता रहा, लेकिन बाद में कंपनी संचालक विमल शुक्ला टालमटोल करने लगे। जब वाहन वापस मांगा गया तो बहाने बनाए जाने लगे। इसी बीच दिल्ली में कार बम धमाके की खबरें देखने के बाद उन्होंने एहतियातन अपने वाहन के ऑनलाइन दस्तावेज चेक किए। तब पता चला कि वाहन मार्च 2023 में मनोज कुमार पांडे के नाम ट्रांसफर हो चुका है।

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न आरटीओ गए, न हस्ताक्षर किए

धीरेन्द्र का कहना है कि उन्होंने न तो आरटीओ जाकर कोई प्रक्रिया पूरी की और न ही किसी ट्रांसफर दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इसके बावजूद वाहन किसी और के नाम दर्ज हो गया। इसके बाद उन्होंने थाना कटारा हिल्स और आरटीओ में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद कई दिनों तक थाने के चक्कर काटने पड़े, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जांच में यह सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए वाहन का ट्रांसफर किया गया था। इसके बाद आरटीओ ने कागजों में वाहन को दोबारा धीरेन्द्र सिंह चौहान के नाम कर दिया।

ऑनलाइन आवेदन के आधार पर ट्रांसफर

आरटीओ जितेंद्र शर्मा के मुताबिक, वाहन अंतरण की प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से की गई थी। आवेदन के आधार पर तत्कालीन आरटीओ ने सिस्टम में ऑन ट्रांसफर की सूचना दर्ज कर दी। बाद में जब दोनों पक्ष आमने-सामने आए और मामला संदिग्ध पाया गया, तो पूरे प्रकरण की दोबारा सुनवाई की गई। आरटीओ का कहना है कि दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया गया। मोटर यान अधिनियम के प्रावधानों के तहत वाहन अंतरण की सूचना को निरस्त कर दिया गया है और वाहन को फिर से असली मालिक के नाम दर्ज कर दिया गया। मगर इसमें वह दोबारा फिर से अपील कर सकते हैं

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